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Sunday, 7 August 2011

करीब 15 हजार छात्र किताबों से महरुम

-मिडिल स्कूलों में अभी तक नहीं बांटी किताबें
-किताबें नहीं मिलने से हो रही शिक्षा प्रभावित
-अगले माह होगी फस्र्ट सेमेस्टर की परीक्षा

फरीदाबाद। सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों के मिडिल क्लास के छात्र-छात्राओं को दिए जाने वाले किताबें अभी तक नहीं मिल पाई है। गरीब बच्चों को स्कूलों से जोडऩे व बेहतर तालीम मुहैया कराने में शिक्षा महकमा कतई गंभीर नहीं है। क्लास छठी से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को अभी तक नि:शुल्क किताबें नहीं मिलने से छात्र-छात्राओं की शिक्षा पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
दरअसल, जिले के 130 सरकारी स्कूलों में पहली से छठी कक्षा तक आठवीं तक करीब 15 हजार बच्चे पढ़ रहे हैं। हैरत की बात है, सर्व शिक्षा अभियान के तहत करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद इन्हें समय पर नि:शुल्क पुस्तकें नहीं मिल ही रही हैं। हालांकि राज्य सरकार ने गुणवत्तापरक शिक्षा को पाठ्यक्रम सीबीएसई पैटर्न की तर्ज पर शुरू किया। इसके तहत अप्रैल में नया सत्र शुरू करने और छात्र-छात्राओं को मुफ्त किताबें देने का प्रावधान भी बना। मगर अफसोस, अगस्त तक स्कूलों में पूरी किताबें नहीं पहुंची हैं। कुछ स्कूलों में एक या दो सेट किताबें पहुंची है तो कुछ स्कूलों में आधी अधूरी ही किताबें छात्र-छात्राओं को मिली है, जबकि दूर-दराज के इलाकों में छात्र-छात्राएं किताबों से अभी तक महरुम हैं। जिला शिक्षा विभाग यातायात की असुविधा की वजह मान रहा है। स्कूलों से मिली जानकारी के अनुसार, किताबों के लिए कई बार जिला शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक को लिखित सूचना दी गई, लेकिन शिक्षा महकमा परिवहन की असुविधा की बात कहकर हाथ खड़े कर दिए।
खास बात यह है कि छठी से आठवीं की छात्र-छात्राओं की परीक्षा सितंबर के पहले सप्ताह में होगी। किताबों की गैर मौजूदगी में छात्र-छात्राओं के लिए परीक्षा की तैयारी करना मुश्किल हो रहा है। किताब न होने के कारण स्कूलों में भी पढ़ाई बाधित हो रही है। कुछ स्कूलों में जैसे-तैसे पुरानी पुस्तकों से काम चलाया जा रहा है। चूंकि पुरानी किताबों की हालत जर्जर है। विशेषकर शुरू के आखरी पाठ मौजूद नहीं होने की समस्या के चलते भी विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है। मुफ्त किताब के आस में अभिभावक भी बाजार से किताब दिलाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे है। बाजार में हरियाणा विद्यालय शिक्षण बोर्ड की किताबें मौजूद नहीं है। दुकानदार भी सरकारी किताबों में लाभ न होने के कारण निजी किताबों को ज्यादा प्रोत्साहन दे रहे है।
राजेंद्र कुमार, जिला प्रधान, हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ : सरकार शिक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। एक तरफ बायोमैट्रिक मशीन लगाकर शिक्षकों पर नकेल कसने की कोशिश कर रही है तो दूसरी तरफ पढऩे-पढ़ाने के लिए जरुरतमंद छात्र-छात्राओं को किताबें मुहैया नहीं करा रही है। किताबें न होने से बच्चे पढ़ाई पर पूरी तरह ध्यान नहीं दे रहे है। जबकि अगले माह में बच्चों की परीक्षा होनी हैं। बच्चे के फेल होने पर टीचर्स को ही दोष दिया जाएंगा।
राजीव कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी : आवागमन की असुविधा के कारण कुछ स्कूलों में किताबें नहीं पहुंच पाई है। सोमवार को डीसी साहब से बात करके यातायात उन स्कूलों में किताबों पहुचाई जाएंगी जहां अभी तक किताबें छात्र-छात्राओं को नहीं मिल पाई है। छात्र-छात्राआें की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए स्कूलों के प्रिसिंपल को अप्रैल में बच्चों से पुराने किताब लेकर नए छात्र-छात्राओं को दी जाने की आदेश दी गई थी।
---------मो. शाहनवाज