Wednesday, 3 August 2011

सरकारी स्कूलों में एजुसेट सिस्टम फेल

फरीदाबाद। प्रदेश सरकार की शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता लाने की महत्वाकांक्षी योजना एजुसेट पूरे जिला में पूरी तरह ठप हो चुका है। स्कूलों में लगे डीटीएच भी लंबें अर्से से काम नहीं कर रहा हैं। यूपीएस की बैटरी खत्म होने और ज्यादा पावर कट के कारण कंप्यूटर लैब, प्रोजेक्टर, कंप्यूटर और टेली कांफ्रेसिंग सिस्टम डिब्बाबंद साबित हो रहा है। 2010 से एजुसेट और डीटीएच सिस्टम पूरी तरह ठप है। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए 2005 में सभी प्राथमिक, मिडिल, उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में डीटीएच टीवी लगवाए थे, जिन पर विभिन्न कक्षाआें के विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक प्रसारण किया जाता था। इसके लिए विशेषज्ञ शिक्षकों की भी सेवाएं ली जाती थी।
जिला के सभी स्कूलों में एजुसेट सिस्टम लगाए हुए हैं, लेकिन सभी स्कूलों में एजुसेट सिस्टम काम नहीं कर रहे हैं, क्योंकि डीटीएच के साथ लगाई गई यूपीएस बैट्रियां खराब हो चुकी हैं। विभिन्न स्कूलों में प्रधानाचार्य ने बताया कि बैट्री खराब हो चुकी हैं और इस संबंध में स्कूल प्रशासन ने निदेशालय को कई बार सूचित किया जा चुका है, लेकिन नई बैट्री नहीं लगाए जाने से प्रसारण बाधित हो रहा है।
स्कूल प्राध्यपकों का मानना है कि एजुसेट प्रसारण विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो रहा था, लेकिन प्रसारण ब्रेक हो जाने के कारण छात्र-छात्राओं को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। छात्र-छात्राएं भी पढऩे के ललक से ज्यादा आने लगी थी। गौरतलब है कि सरकार ने अबाध रुप से प्रसारण के लिए स्कूलों में डीटीएच के साथ यूपीएस भी लगवाए थे ताकि पावर कट के दौरान भी एजुसेट सिस्टम काम करता रहे और विद्यार्थी उनके लिए आने वाले कार्यक्रम से वंचि न हों।
पिछले एक साल से किसी भी स्कूल में एजुसेट का इस्तेमाल नहीं हुआ है जबकि हरियाणा के सरकारी स्कूलों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए एजुसेट लगाए गए थे ताकि विशे विशेषज्ञों का डीटीएच (उपग्रह के माध्यम) से सीधा व्याख्यान छात्र-छात्राओं तक पहुंचाया जा सके। विज्ञान के छात्रों के लिए चंडीगढ़ स्टूडियो से सीधा व्याख्यान का प्रसार किया जाता था। इस सिस्टम में छात्र-छात्राओं को विषय विशेषज्ञों से सीधे सवाल-जवाब करने की भी व्यवस्था थी। यह प्रयास विद्यार्थियों में न केवल लोकप्रिय हुआ बल्कि विज्ञान के विद्यार्थियों को इससे लाभ भी मिलने लगा, इसके परिणाम देखकर शिक्षा विभाग ने ब्लॉक व जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय को सीधा निदेशालय से जोड़ दिया था लेकिन चार साल में इसने दम तोड़ दिया। आज यह स्थिति है कि के 4२ स्कूलों मे न तो एजुसेट काम कर रहा है, न ही डीटीएच। एजुसेट के उपकरण छतों पर रखे हैं व अन्य सामान अलमारियों में बंद पड़ा है।
क्या है एजुसेट : एजुसेट सेटेलाइट पहली भारतीय सेटेलाइट है, जिसे विशेष रुप से शिक्षा क्षेत्र में प्रयोग के लिए अंतरिक्ष में छोड़ा गया था। 2१ सितंबर 2004 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने श्रीहरिकोटा से 19५0 किलोग्राम भारी उपग्रह को सफल उड़ान भरी थी। डिस्टेंस एजुकेशन सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसे छोड़ा गया था। मुख्य रूप से यह सेटेलाइट अन्य देशों से शिक्षा से जुड़ी जानकारियों का आदान प्रदान करती है।
राजीव कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी : जिला के सभी स्कूलों में बैट्रियों की लाइफ खत्म हो जाने के कारण एजुसेट और सिस्टम ठप पड़ गया है। नई बैट्रियां खरीदने के लिए चंडीगढ़ निदेशालय को पत्र लिख दिया गया है। निदेशालय के उच्च क्रय समिति ने आश्वासन दिया है कि इस माह में यूपीए के लिए बैट्रियां खरीद कर स्कूलों को आवंटित कर दी जाएंगी। साथ ही जिला के लिए एजुसेट इंजीनियर की नियुक्ति कर दी गई है।
सुशील कन्वा, प्रांतीय उपाध्यक्ष, हरियाणा स्कूल लेक्चर्स एसोसिएशन : स्कूलों में एजुसेट और डीटीएच के जरिए शिक्षा में क्वालिटी लाने के लिए गंभीर नहीं है। शिक्षकों के कारण ही अब तक एजुसेट कुछ फीसदी सफल हो पाया था। लेकिन तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए ब्लॉक स्तर पर इंजीनियर भी नहीं है। जिससे एजुसेट योजना को काफी धक्का लगा है।
डॉ. धर्मदेव शर्मा, प्रधानाचार्य, गर्वमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ओल्ड फरीदाबाद : एजुसेट सिस्टम पूरी तरह बंद है। जिसके कारण एजुसेट शिक्षा का फायदा छात्र-छात्राओं को नहीं हो रहा है। तकनीकी खामियों को दूर के लिए जिला शिक्षा विभाग से इंजीनियर आता है लेकिन बैट्री की खराबी बता कर हाजिरी लगाकर चला जाता है। नई बैट्री के लिए जिला शिक्षा विभाग को कई बार पत्र लिखा गया है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
----------मो. शाहनवाज

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